इस बयाबाँ से जहाँ में सारी राहें अजनबी
By rahi-italviJanuary 4, 2024
इस बयाबाँ से जहाँ हैं सारी राहें अजनबी
चलते हैं मेरे फ़ुग़ाँ मेरी ये आहें अजनबी
अर्ज़ पे आवारगी अफ़्लाक में बेगानगी
हम-सफ़र हैं सिर्फ़ तारों की निगाहें अजनबी
फैलता है शहर-ए-दिल में हर कहीं पर इंतिशार
हमला करने आती हैं ग़म की सिपाहें अजनबी
हम क्यों जाएँ ऐ दिवानो होश वालों के दयार
होश की जो हैं पनाहें हैं पनाहें अजनबी
'राही' को दैर-आश्ना सी एक दिन लिपटेगी मौत
भींचती हैं हम को अब हस्ती की बाहें अजनबी
चलते हैं मेरे फ़ुग़ाँ मेरी ये आहें अजनबी
अर्ज़ पे आवारगी अफ़्लाक में बेगानगी
हम-सफ़र हैं सिर्फ़ तारों की निगाहें अजनबी
फैलता है शहर-ए-दिल में हर कहीं पर इंतिशार
हमला करने आती हैं ग़म की सिपाहें अजनबी
हम क्यों जाएँ ऐ दिवानो होश वालों के दयार
होश की जो हैं पनाहें हैं पनाहें अजनबी
'राही' को दैर-आश्ना सी एक दिन लिपटेगी मौत
भींचती हैं हम को अब हस्ती की बाहें अजनबी
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