इस लिए मौसम सुहाना हो गया
By shyam-vashishtha-shahidJanuary 5, 2024
इस लिए मौसम सुहाना हो गया
चाँद के घर आना-जाना हो गया
क्यों बिछड़ता ही नहीं मुझ से कभी
वो जिसे बिछड़े ज़माना हो गया
क़िस्मतों वाला है यारो वो शजर
जो परिंदों का ठिकाना हो गया
तीर करने को तुम्हारे कामयाब
दिल मिरा ख़ुद ही निशाना हो गया
बारहा मेरा मना लेना उन्हें
रूठ जाने का बहाना हो गया
उन की आँखों में रहा करते थे हम
छोड़िए क़िस्सा पुराना हो गया
हो गया इक़रार जब इंकार से
और भी मुश्किल निभाना हो गया
दिल के कोने में छुपा रहता था जो
अब वो बच्चा भी सियाना हो गया
चाँद के घर आना-जाना हो गया
क्यों बिछड़ता ही नहीं मुझ से कभी
वो जिसे बिछड़े ज़माना हो गया
क़िस्मतों वाला है यारो वो शजर
जो परिंदों का ठिकाना हो गया
तीर करने को तुम्हारे कामयाब
दिल मिरा ख़ुद ही निशाना हो गया
बारहा मेरा मना लेना उन्हें
रूठ जाने का बहाना हो गया
उन की आँखों में रहा करते थे हम
छोड़िए क़िस्सा पुराना हो गया
हो गया इक़रार जब इंकार से
और भी मुश्किल निभाना हो गया
दिल के कोने में छुपा रहता था जो
अब वो बच्चा भी सियाना हो गया
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