इस लिए तो बुझा नहीं हूँ मैं

By aalam-nizamiJanuary 18, 2024
इस लिए तो बुझा नहीं हूँ मैं
बुझने वाला दिया नहीं हूँ मैं
जो भी है सब मिरा मुक़द्दर है
ज़िंदगी से ख़फ़ा नहीं हूँ मैं


मेरी ता'ज़ीम क्यों करे दुनिया
आदमी हूँ ख़ुदा नहीं हूँ मैं
आंधियों साँस चल रही है अभी
जल रहा हूँ बुझा नहीं हूँ मैं


बस ज़रा तल्ख़ियाँ मिज़ाज में हैं
दोस्तो सर-फिरा नहीं हूँ मैं
लोग जितना बुरा बताते हैं
यार उतना बुरा नहीं हूँ मैं


मुस्तरद कर दे जिस को ये दुनिया
वो ग़लत फ़ैसला नहीं हूँ मैं
मुझ को अपनी तलाश है 'आलम'
ख़ुद से अब तक मिला नहीं हूँ मैं


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