इस से पहले तो पुर-यक़ीं भी न थे
By atif-raisJanuary 2, 2024
इस से पहले तो पुर-यक़ीं भी न थे
पर गुमाँ दिल में जागुज़ीँ भी न थे
दिल तो मौजूद था वहीं पे मगर
और हम जिस्म में कहीं भी न थे
तेरे आने से पेशतर दुनियाँ
हम यहाँ के कभी मकीं भी न थे
तुम को देखा तो हो गए रौशन
वर्ना चेहरे पे मह-जबीं भी न थे
तुम ने तो आसमाँ कहा है हमें
यार हम लोग तो ज़मीं भी न थे
हम ने 'आतिफ़' गुमाँ ज़ियादा किया
लोग अपने मगर हसीं भी न थे
पर गुमाँ दिल में जागुज़ीँ भी न थे
दिल तो मौजूद था वहीं पे मगर
और हम जिस्म में कहीं भी न थे
तेरे आने से पेशतर दुनियाँ
हम यहाँ के कभी मकीं भी न थे
तुम को देखा तो हो गए रौशन
वर्ना चेहरे पे मह-जबीं भी न थे
तुम ने तो आसमाँ कहा है हमें
यार हम लोग तो ज़मीं भी न थे
हम ने 'आतिफ़' गुमाँ ज़ियादा किया
लोग अपने मगर हसीं भी न थे
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