'इश्क़ का कितना काम पड़ा है
By fahmi-badayuniFebruary 5, 2024
'इश्क़ का कितना काम पड़ा है
और तसव्वुर जाम पड़ा है
आज उसी को फैलाएँगे
ज़ेहन में तेरा नाम पड़ा है
एक कहानी लाए हैं हम
तुम पे कोई अंजाम पड़ा है
मयख़ाने को दान करूँगा
टूटा सा इक जाम पड़ा है
बच के निकलना घर से बाहर
चौखट पर इल्ज़ाम पड़ा है
मैं आँगन में टहल रहा हूँ
बिस्तर पर आराम पड़ा है
उस नादाँ को कौन बताए
नीम के नीचे आम पड़ा है
और तसव्वुर जाम पड़ा है
आज उसी को फैलाएँगे
ज़ेहन में तेरा नाम पड़ा है
एक कहानी लाए हैं हम
तुम पे कोई अंजाम पड़ा है
मयख़ाने को दान करूँगा
टूटा सा इक जाम पड़ा है
बच के निकलना घर से बाहर
चौखट पर इल्ज़ाम पड़ा है
मैं आँगन में टहल रहा हूँ
बिस्तर पर आराम पड़ा है
उस नादाँ को कौन बताए
नीम के नीचे आम पड़ा है
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