इतना आसाँ है छोड़ना उस को

By syed-masood-naqviJanuary 5, 2024
इतना आसाँ है छोड़ना उस को
दूसरा 'इश्क़ फिर जुटाना है
अस्ल में झूट बोलते हो तुम
इस लिए आइना दिखाना है


आज भी सादगी क़यामत है
हर दिखावे को ये दिखाना है
मुख़्बिरी कर रहे हैं जो उस की
उन को सब कुछ ग़लत बताना है


दरगुज़र होने थे गुनाह मिरे
ये मरज़ तो फ़क़त बहाना है
अस्ल 'इज़्ज़त छुपी है ज़िल्लत में
हाँ मगर तुम ने कब ये जाना है


ज़ब्त क़ाबू में आ गया फिर से
उस को अब ठीक से बताना है
21844 viewsghazalHindi