जा-ब-जा ज़ुल्मतों का डेरा है

By nushur-wahidiJanuary 4, 2024
जा-ब-जा ज़ुल्मतों का डेरा है
बुझ गई शम'-ए-ग़म अंधेरा है
'इश्क़ इक कारवान-ए-आगाही
हुस्न इक बे-ख़बर लुटेरा है


शहर की ख़ुश-नसीब गलियों में
हम से बद-क़िस्मतों का फेरा है
इक ज़माना हुआ है रूठे हुए
अब भी आ जाइए सवेरा है


एक लम्हे की रौशनी है 'नुशूर'
वक़्त इक मुस्तक़िल अंधेरा है
40542 viewsghazalHindi