जाने दिए ने बोला क्या
By fahmi-badayuniFebruary 5, 2024
जाने दिए ने बोला क्या
और हवा ने समझा क्या
पैदा कर इंकार कोई
ख़ाली शोर-शराबा क्या
जिस के लिए पर्वाज़ न हो
ऐसा आब-ओ-दाना क्या
तोड़ दिया लुटने के बा'द
दरवाज़े का होता क्या
किस मतलब के ‘अर्ज़-ओ-तूल
आब नहीं तो दरिया क्या
दूर तलक नीला आकाश
इतना बड़ा भी पर्दा क्या
हम भी मिट्टी तुम भी राख
तेज़ हवा का शिकवा क्या
उस की गली में आ गए काम
और हमारा होता क्या
अफ़ज़ल है दिल की बेगार
'इश्क़ में घाटा-वाटा क्या
और हवा ने समझा क्या
पैदा कर इंकार कोई
ख़ाली शोर-शराबा क्या
जिस के लिए पर्वाज़ न हो
ऐसा आब-ओ-दाना क्या
तोड़ दिया लुटने के बा'द
दरवाज़े का होता क्या
किस मतलब के ‘अर्ज़-ओ-तूल
आब नहीं तो दरिया क्या
दूर तलक नीला आकाश
इतना बड़ा भी पर्दा क्या
हम भी मिट्टी तुम भी राख
तेज़ हवा का शिकवा क्या
उस की गली में आ गए काम
और हमारा होता क्या
अफ़ज़ल है दिल की बेगार
'इश्क़ में घाटा-वाटा क्या
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