जहाँ से आगे भी होगा कहीं कोई मंज़र

By atif-raisJanuary 2, 2024
जहाँ से आगे भी होगा कहीं कोई मंज़र
हमें दिखाया गया है बस एक ही मंज़र
फिर उस के बा'द हमें कुछ नज़र नहीं आया
तुम्हारे 'अक्स ने धुँदला दिए सभी मंज़र


नदी पे आ के हुई है शदीद मायूसी
मैं सोचता था मिलेगा मुझे वही मंज़र
कोई निगाह न कर दे तुझे भी आलूदा
कि काएनात का है तू बस आख़िरी मंज़र


मगर वो बात कहाँ अब जो थी तिरे होते
नज़र तो आएँगे सब को यहाँ कई मंज़र
ये नाव झील किनारा सभी परेशाँ हैं
पसंद कर लिया उस ने नया कोई मंज़र


56988 viewsghazalHindi