जलते हुए चराग़ की लौ से बुझा हूँ मैं

By ahmad-ayazFebruary 24, 2025
जलते हुए चराग़ की लौ से बुझा हूँ मैं
या'नी कि तीरगी से बना दस्त-ओ-पा हूँ मैं
इतनी भी बे-रुख़ी से न तू दरकिनार कर
माना कि मावरा हूँ मगर मसअला हूँ मैं


माना कि कम-सुख़न हूँ मगर बे-ज़बाँ नहीं
इक मरहले के बा'द ग़ज़ब बोलता हूँ मैं
मेरी किताब-ए-रुख़ को अगर पढ़ सको पढ़ो
हर लफ़्ज़ लफ़्ज़ दिल की गिरह खोलता हूँ मैं


84606 viewsghazalHindi