झील सी आँख को दरियाओं का धारा कर के

By asima-farazJanuary 2, 2024
झील सी आँख को दरियाओं का धारा कर के
ख़ुश है वो शख़्स ये नुक़्सान हमारा कर के
उस को लगता है कि आसाँ है बिछड़ना मुझ से
क्या वो जी लेगा मिरा हिज्र गवारा कर के


आ कि मिल बैठ के जीने का हुनर सीखते हैं
ज़िंदगी यूँ न गुज़र मुझ से किनारा कर के
तुम ने जाते हुए तोहफ़े में मुझे बख़्शा था
दिल में रक्खा है वही अश्क सितारा कर के


दुख उदासी ये घुटन और ये ख़ाली दामन
क्या मिला मुझ को तिरे साथ गुज़ारा कर के
तुम ने छोड़ा तो किसी सम्त न देखा मैं ने
यूँही जीती रही ख़ुद को मैं तुम्हारा कर के


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