झूम ले हँस-बोल ले प्यारी अगर है ज़िंदगी

By muzaffar-warsiJanuary 4, 2024
झूम ले हँस-बोल ले प्यारी अगर है ज़िंदगी
साँस के बस एक झोंके का सफ़र है ज़िंदगी
देर ही बनते बिगड़ते कुछ इसे लगती नहीं
फूल की दीवार पर शबनम का घर है ज़िंदगी


ज़िंदगी में जो भी करना चाहता है कर गुज़र
क्या ख़बर बरसों की है या लम्हा-भर है ज़िंदगी
अजनबी हालात से भी हँस के मिलना चाहिए
हर क़दम पर मुड़ने वाली रहगुज़र है ज़िंदगी


भेजता रहता हूँ जाने अपनी साँसें किस के नाम
यार-ए-ना-मा'लूम की इक नामा-बर है ज़िंदगी
दश्त में निकलो तो काँटा है थकन है गर्द है
नाव में बैठो तो लगता है भँवर है ज़िंदगी


ता-अबद इस से न टूटेगा 'मुज़फ़्फ़र' राब्ता
मौत से आगे अदम के नाम पर है ज़िंदगी
54646 viewsghazalHindi