जी तो हल्का हुआ है रोने से
By naqui-niaziJanuary 4, 2024
जी तो हल्का हुआ है रोने से
पर है डरता किसी को खोने से
हम तो बे-मौत मर ही जाएँगे
तेरी यादों से हाथ धोने से
अब भुला दूँ ये चाहता हूँ उन्हें
ख़्वाब देखे थे जो सलोने से
संग-दिल मोम हो गया है मियाँ
आज इक बेवफ़ा के रोने से
चाहता हूँ के 'इश्क़ पैदा हो
बीज चाहत का दिल में बोने से
ज़िंदगी-भर की उड़ गईं नींदें
आज इक रात-भर के सोने से
ख़ूब थे जब जुदा जुदा थे हम
क्या मिला हम को एक होने से
उन की महफ़िल पे क्या असर है 'नक़ी'
मेरे होने से या न होने से
पर है डरता किसी को खोने से
हम तो बे-मौत मर ही जाएँगे
तेरी यादों से हाथ धोने से
अब भुला दूँ ये चाहता हूँ उन्हें
ख़्वाब देखे थे जो सलोने से
संग-दिल मोम हो गया है मियाँ
आज इक बेवफ़ा के रोने से
चाहता हूँ के 'इश्क़ पैदा हो
बीज चाहत का दिल में बोने से
ज़िंदगी-भर की उड़ गईं नींदें
आज इक रात-भर के सोने से
ख़ूब थे जब जुदा जुदा थे हम
क्या मिला हम को एक होने से
उन की महफ़िल पे क्या असर है 'नक़ी'
मेरे होने से या न होने से
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