जिस जवाँ के सीने में ज़लज़ले नहीं होते
By mirza-naseer-khalidJanuary 4, 2024
जिस जवाँ के सीने में ज़लज़ले नहीं होते
उस जवाँ के लहजे में दबदबे नहीं होते
इक ज़रा करो हिम्मत दुनिया-भर के मज़लूमो
ज़ालिमों में देखा है हौसले नहीं होते
जंग लड़ना पड़ती है अपने ज़ोर-ए-बाज़ू पर
ज़िंदगी के मैदाँ में मो'जिज़े नहीं होते
अपनी अपनी मेहनत का फल सभी को मिलता है
आसमाँ से क़िस्मत के फ़ैसले नहीं होते
जितने चाहें दौलत के ढेर भी लगा लें वो
बे-ज़मीर लोगों के मर्तबे नहीं होते
या वो पकड़े जाते हैं जो कि कुछ नहीं करते
या वो जिन के ऊपर तक राब्ते नहीं होते
जो दरख़्त ख़ाली हों फूल और पत्तों से
उन पे पंछियों के भी घोंसले नहीं होते
बह रहा है इतना ख़ूँ शहर में कि लगता है
जंगलों में अब शायद भेड़िये नहीं होते
उस जवाँ के लहजे में दबदबे नहीं होते
इक ज़रा करो हिम्मत दुनिया-भर के मज़लूमो
ज़ालिमों में देखा है हौसले नहीं होते
जंग लड़ना पड़ती है अपने ज़ोर-ए-बाज़ू पर
ज़िंदगी के मैदाँ में मो'जिज़े नहीं होते
अपनी अपनी मेहनत का फल सभी को मिलता है
आसमाँ से क़िस्मत के फ़ैसले नहीं होते
जितने चाहें दौलत के ढेर भी लगा लें वो
बे-ज़मीर लोगों के मर्तबे नहीं होते
या वो पकड़े जाते हैं जो कि कुछ नहीं करते
या वो जिन के ऊपर तक राब्ते नहीं होते
जो दरख़्त ख़ाली हों फूल और पत्तों से
उन पे पंछियों के भी घोंसले नहीं होते
बह रहा है इतना ख़ूँ शहर में कि लगता है
जंगलों में अब शायद भेड़िये नहीं होते
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