जिस की ख़ातिर सारा ज़माना छोड़ दिया

By aalam-nizamiJanuary 18, 2024
जिस की ख़ातिर सारा ज़माना छोड़ दिया
उस ने मेरा फ़ोन उठाना छोड़ दिया
सारी सारी रात सताना छोड़ दिया
तुम ने क्यों ख़्वाबों में आना छोड़ दिया


उन की ग़लत-फ़हमी को कहाँ तक दूर करें
रूठे हुओं को हम ने मनाना छोड़ दिया
जब से हक़ीक़त सामने आई ख़्वाबों की
तस्वीरों से दिल बहलाना छोड़ दिया


पूछ रही हैं आ कर मौजें साहिल से
उस ने क्यों पनघट पर आना छोड़ दिया
हर दिन इस के पागल-पन से तंग आ कर
मैं ने इस दिल को समझाना छोड़ दिया


दोस्त बना कर धोका दिया जब से उस ने
हम ने ज़ियादा दोस्त बनाना छोड़ दिया
'आलम' जिन से मिल न सका दिल बरसों से
हम ने उन से हाथ मिलाना छोड़ दिया


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