जिस्म रोता है रूह गाती है

By neha-nazakatJanuary 4, 2024
जिस्म रोता है रूह गाती है
अब तिरी याद क्यों सताती है
ये तिरे ज़ख़्म यूँ नहीं भरते
तू मुसलसल जो चोट खाती है


बे-सबब आँख उस की भरती है
वो बिना बात मुस्कुराती है
उस से कह दो कि 'इश्क़ मरहम है
कैसे छूने से छटपटाती है


ज़िंदगी राएगाँ मगर फिर भी
साँस ये है कि चलती जाती है
शुक्र मानो कि इक 'अदद लड़की
अपना दुखड़ा तुम्हें सुनाती है


यार राधा है श्याम हरजाई
तू 'अबस टेसुए बहाती है
72785 viewsghazalHindi