जो चिड़िया मेरे घर आ जा रही थी

By fahmi-badayuniFebruary 5, 2024
जो चिड़िया मेरे घर आ जा रही थी
तुम्हारे घर से तिनके ला रही थी
बदन उस का भी गूँगा हो गया था
हमारी भी नज़र हकला रही थी


हवा ने क्यों बुझाया था दिये को
तिरी ख़ुश्बू मुझे समझा रही थी
मिरी आवाज़ पे क़ब्ज़ा जमा कर
ज़रूरत झूठ बोले जा रही थी


'इबादत के दरीचे खुल गए थे
मोहब्बत आ रही थी जा रही थी
कहा सीरत ने उस की नज़्म लिक्खो
मगर सूरत ग़ज़ल लिखवा रही थी


भँवर से बचने में कश्ती हमारी
मगरमच्छों में घिरती जा रही थी
मुसलसल बेचना पड़ती थीं ख़ुशियाँ
ग़मों पर इतनी लागत आ रही थी


49783 viewsghazalHindi