जो दम के साथ थे कल तक कभी जुदा भी न थे

By bazm-ansariJanuary 2, 2024
जो दम के साथ थे कल तक कभी जुदा भी न थे
वो आज ऐसे मिले जैसे आश्ना भी न थे
किसे गुमाँ था वफ़ाओं-भरी रिफ़ाक़त को
वो भूल जाएँगे इतने तो बेवफ़ा भी न थे


किसी ने कर दिया कुछ और बद-गुमाँ हम से
ख़फ़ा वो थे मगर ऐसे गुरेज़-पा भी न थे
हैं मुझ से दाद-तलब हुस्न-ए-ना-ख़ुदाई के
वो लोग जो मिरी कश्ती के नाख़ुदा भी न थे


वफ़ाएँ कर के वफ़ा पर भी शर्मसार थे हम
जफ़ाएँ कर के वो शर्मिंदा-ए-जफ़ा भी न थे
मिरा 'इलाज मिरे चारासाज़ से न हुआ
वगरना 'बज़्म' मिरे ज़ख़्म ला-दवा भी न थे


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