जो दिल से निकले उसी बात को बजा समझो
By ustad-vajahat-husain-khanJanuary 5, 2024
जो दिल से निकले उसी बात को बजा समझो
ज़बान-ए-ख़ल्क़ को नक़्क़ारा-ए-ख़ुदा समझो
जो सिर्फ़ बात करे और 'अमल में कोरा हो
तुम ऐसे शख़्स के किरदार को रिया समझो
फ़रेब ऐसे न दो सिलसिले बढ़ा के मुझे
मिरे ख़ुलूस मिरे प्यार को ज़रा समझो
जहान-ए-फ़ानी में हर चीज़ है ज़वाल-पज़ीर
फ़ना बक़ा को यहाँ मर्ज़ी-ए-ख़ुदा समझो
तुम उस को लाख मोहब्बत से भी हो समझाते
जो अपना ख़ैर न चाहे उसे बुरा समझो
तुम्हें नजात जो मिलती रही हर आफ़त से
तुम्हारे साथ है माँ-बाप की दु'आ समझो
तुम्हारे फ़न को जो 'अज़्मत मिली है ऐ 'दाएम'
है रब की ख़ास 'इनायत इसे 'अता समझो
ज़बान-ए-ख़ल्क़ को नक़्क़ारा-ए-ख़ुदा समझो
जो सिर्फ़ बात करे और 'अमल में कोरा हो
तुम ऐसे शख़्स के किरदार को रिया समझो
फ़रेब ऐसे न दो सिलसिले बढ़ा के मुझे
मिरे ख़ुलूस मिरे प्यार को ज़रा समझो
जहान-ए-फ़ानी में हर चीज़ है ज़वाल-पज़ीर
फ़ना बक़ा को यहाँ मर्ज़ी-ए-ख़ुदा समझो
तुम उस को लाख मोहब्बत से भी हो समझाते
जो अपना ख़ैर न चाहे उसे बुरा समझो
तुम्हें नजात जो मिलती रही हर आफ़त से
तुम्हारे साथ है माँ-बाप की दु'आ समझो
तुम्हारे फ़न को जो 'अज़्मत मिली है ऐ 'दाएम'
है रब की ख़ास 'इनायत इसे 'अता समझो
75845 viewsghazal • Hindi