जो टुकड़ों में बिखरते जा रहे हो

By faisal-qadri-gunnauriJanuary 2, 2024
जो टुकड़ों में बिखरते जा रहे हो
तभी बे-मौत मरते जा रहे हो
तुम इतना क्यों सँवरते जा रहे हो
मिरे दिल में उतरते जा रहे हो


डुबोना चाहती है जितना दुनिया
तुम उतने ही उभरते जा रहे हो
तुम्हें क्या और कोई मिल गया है
मुझे इग्नोर करते जा रहे हो


तुम्हें शायद मोहब्बत हो गई है
ज़ियादा ही निखरते जा रहे हो
हमारी ज़िंदगी बे-रंग सी है
तुम्ही तो रंग भरते जा रहे हो


चलो बे-ख़ौफ़ इस रस्ते पे 'फ़ैसल'
ये तुम क्यों डरते डरते जा रहे हो
70165 viewsghazalHindi