जुड़ाव इतना भी आसाँ नहीं वफ़ाओं से

By anaam-damohiFebruary 5, 2024
जुड़ाव इतना भी आसाँ नहीं वफ़ाओं से
उलझना पड़ता है दुनिया के देवताओं से
कुछ इस तरह भी लिपटते हैं दर्द-ओ-ग़म मुझ से
कि जैसे बच्चे लिपटते हैं अपनी माओं से


फ़िराक़-ए-यार में मुझ को क़ज़ा तो आनी थी
चराग़ बचता कहाँ तक भला हवाओं से
बचा सकी न मरीज़-ए-वफ़ा को चारागरी
तबीब कहते थे बच जाएगा दवाओं से


चला गया है वो सहरा से अपने घर की तरफ़
पलट के आ गया 'इन’आम' भी ख़लाओं से
33795 viewsghazalHindi