जुनून-ए-शौक़ में आदाब-ए-रक़्स-ए-वहशत क्या
By ahmar-nadeemFebruary 5, 2024
जुनून-ए-शौक़ में आदाब-ए-रक़्स-ए-वहशत क्या
शिकस्ता पाँव को पाज़ेब-ए-शान-ओ-शौकत क्या
हम अपने आप में रहते नहीं हैं दम-भर को
हमारे वास्ते दीवार-ओ-दर की ज़हमत क्या
बड़े वसूक़ से आशुफ़्ता-सर ये पूछते हैं
दयार-ए-रंज-ओ-मेहन में हमारी वक़'अत क्या
ये दौर-ए-जहल है मद्ह-ओ-सना-ए-ज़ुल्मत कर
ज़बान-ए-ख़ामा से तौसीफ़-ए-अहल-ए-हिकमत क्या
जो रंग लाए तो बेहतर वगरना दफ़्न करो
लहू लहू है मिरा ख़ूँ-बहा की क़ीमत क्या
मता'-ए-सब्र-ओ-तहम्मुल को दोनों हाथों से
लुटाने हम जो चले हैं तो इतनी हैरत क्या
शिकस्ता पाँव को पाज़ेब-ए-शान-ओ-शौकत क्या
हम अपने आप में रहते नहीं हैं दम-भर को
हमारे वास्ते दीवार-ओ-दर की ज़हमत क्या
बड़े वसूक़ से आशुफ़्ता-सर ये पूछते हैं
दयार-ए-रंज-ओ-मेहन में हमारी वक़'अत क्या
ये दौर-ए-जहल है मद्ह-ओ-सना-ए-ज़ुल्मत कर
ज़बान-ए-ख़ामा से तौसीफ़-ए-अहल-ए-हिकमत क्या
जो रंग लाए तो बेहतर वगरना दफ़्न करो
लहू लहू है मिरा ख़ूँ-बहा की क़ीमत क्या
मता'-ए-सब्र-ओ-तहम्मुल को दोनों हाथों से
लुटाने हम जो चले हैं तो इतनी हैरत क्या
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