काम ये भी नया करे कोई

By shyam-vashishtha-shahidJanuary 5, 2024
काम ये भी नया करे कोई
ख़ुद को ख़ुद से जुदा करे कोई
जिस्म की क़ैद में हूँ बरसों से
मुझ को मुझ से रिहा करे कोई


देखिए हौसला चराग़ों का
उन की ज़िद है हवा करे कोई
मेरे काँधे पे रख के सर अपना
मेरी ग़ज़लें सुना करे कोई


सब का होगा भला भलाई से
क्यों किसी का बुरा करे कोई
आग ही आग है जिसे देखो
पानी पानी हुआ करे कोई


आ के महफ़िल में चूम ले मुझ को
काश ऐसी ख़ता करे कोई
चाहे पत्थर हों सारे इक जैसे
कैसे सब को ख़ुदा करे कोई


ज़ख़्म तो दे रहे हो धरती को
काश इस की दवा करे कोई
चाँद तारों को खोजने वालो
आदमी का पता करे कोई


सारी दुनिया में दहशतें भर के
या-ख़ुदा या-ख़ुदा करे कोई
जुर्म लगती है सब को ख़ामोशी
कुछ न बोले तो क्या करे कोई


मेरे ख़त फाड़ के जला डालो
मुझ से ये इल्तिजा करे कोई
73407 viewsghazalHindi