कब नज़ारों का समाँ देखा है
By faisal-qadri-gunnauriJanuary 2, 2024
कब नज़ारों का समाँ देखा है
तुम ने बस दौर-ए-ख़िज़ाँ देखा है
तुम ने ख़ुद को ही नहीं देखा अभी
तुम जो कहते हो जहाँ देखा है
आग देखी ही कहाँ है तुम ने
तुम ने तो सिर्फ़ धुआँ देखा है
दर-हक़ीक़त उन्हें देखा भी नहीं
और कह बैठे कि हाँ देखा है
उन की महफ़िल में 'अजब देखा हाल
शैख़ को रक़्स-कुनाँ देखा है
तेरे सज्दों की तड़प रब जाने
हम ने माथे का निशाँ देखा है
क्या किसी और को देखे 'फ़ैसल'
उस ने ख़ुद को ही कहाँ देखा है
तुम ने बस दौर-ए-ख़िज़ाँ देखा है
तुम ने ख़ुद को ही नहीं देखा अभी
तुम जो कहते हो जहाँ देखा है
आग देखी ही कहाँ है तुम ने
तुम ने तो सिर्फ़ धुआँ देखा है
दर-हक़ीक़त उन्हें देखा भी नहीं
और कह बैठे कि हाँ देखा है
उन की महफ़िल में 'अजब देखा हाल
शैख़ को रक़्स-कुनाँ देखा है
तेरे सज्दों की तड़प रब जाने
हम ने माथे का निशाँ देखा है
क्या किसी और को देखे 'फ़ैसल'
उस ने ख़ुद को ही कहाँ देखा है
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