कभी आवाज़ दे इक बार कोई

By fahmi-badayuniFebruary 5, 2024
कभी आवाज़ दे इक बार कोई
अगर मौजूद है उस पार कोई
सुकूँ से दिन गुज़रता है हमारा
मंगाते ही नहीं अख़बार कोई


यहाँ दैर-ओ-हरम बनने से पहले
नहीं थी आहनी दीवार कोई
हज़ारों काम हैं दश्त-ए-जुनूँ में
यहाँ फिरता नहीं बेकार कोई


अब ऐसे जुर्म भी होने लगे हैं
नहीं है जिन का ज़िम्मेदार कोई
हम अपना अजनबी-पन भूल जाएँ
अगर पहचान ले इक बार कोई


सुना है कल तिरे कूचे में हम ने
कतर दी हाथ से तलवार कोई
11941 viewsghazalHindi