कहोगे तुम नहीं जितना वो अब उतना समझता है
By dr.-bhavnaJanuary 2, 2024
कहोगे तुम नहीं जितना वो अब उतना समझता है
समय की नब्ज़ को अब पेट का बच्चा समझता है
भले खो जाए वो अंधा किसी अंजान रस्ते पर
गली से घर तक आने का मगर रस्ता समझता है
घनेरे जंगलों से आ गया है घर मिरे जब से
मिरा ख़रगोश रोटी को ही अब चारा समझता है
भरम उन को है या मैं ही ज़रा हूँ 'अक़्ल से कच्ची
जिसे देखूँ वही ख़ुद को बहुत अच्छा समझता है
समय की नब्ज़ को अब पेट का बच्चा समझता है
भले खो जाए वो अंधा किसी अंजान रस्ते पर
गली से घर तक आने का मगर रस्ता समझता है
घनेरे जंगलों से आ गया है घर मिरे जब से
मिरा ख़रगोश रोटी को ही अब चारा समझता है
भरम उन को है या मैं ही ज़रा हूँ 'अक़्ल से कच्ची
जिसे देखूँ वही ख़ुद को बहुत अच्छा समझता है
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