कैसे तेवर हैं अब हवा के देख

By fahmi-badayuniFebruary 5, 2024
कैसे तेवर हैं अब हवा के देख
घर से पहले दिया जला के देख
उस के ख़त में कोई दिलासा ढूँड
कोई जुमला घटा बढ़ा के देख


शह्र में ख़ाक तो मिलेगी नहीं
कोई अफ़्वाह ही उड़ा के देख
उन का दीवान कुछ तो काम आए
हाल-ए-दिल 'मीर' को सुना के देख


उस की महफ़िल में जाए रोता हुआ
नामा-बर को सिखा पढ़ा के देख
गर मिरा रक़्स देखना है तो
कुछ मिरे कान में बता के देख


उस की ख़ुश्बू कहीं गई तो नहीं
घर के पर्दे हिला हिला के देख
आइने रहम-दिल भी होते हैं
शर्त यह है कि सर झुका के देख


हँसते हैं या उदास होते हैं
पास वालों को दूर जा के देख
86651 viewsghazalHindi