कलियों को हँसी आ जाती है फूलों पे निखार आ जाता है
By ishrat-jahangirpuriJanuary 3, 2024
कलियों को हँसी आ जाती है फूलों पे निखार आ जाता है
तक़दीर-ए-चमन जाग उठती है जब जान-ए-बहार आ जाता है
पी लेते हैं ख़ुद अपने आँसू घट जाता है उन के तन का लहू
सय्याद असीरों के आगे जब ज़िक्र-ए-बहार आ जाता है
तन्हा है तो इस की फ़िक्र न कर हो राह-ए-तलब में गर्म-ए-सफ़र
'उश्शाक़ का दिल बहलाने को मंज़िल का ग़ुबार आ जाता है
आया जो 'अनादिल पर न तरस बे-जुर्म किया पाबंद-ए-क़फ़स
सय्याद 'अबस अब हमदर्दी क्या जा के वक़ार आ जाता है
उन को हों मुबारक मयख़ाने जो सिर्फ़ हैं मय के दीवाने
मुझ तक तो ख़याल-ए-साक़ी ही मस्ती ब-कनार आ जाता है
ज़ाहिद तू हमारे 'इस्याँ पर यूँ तंज़ न कर मायूस न कर
जब अश्क-ए-नदामत बहते हैं रहमत को भी प्यार आ जाता है
तक़दीर-ए-चमन जाग उठती है जब जान-ए-बहार आ जाता है
पी लेते हैं ख़ुद अपने आँसू घट जाता है उन के तन का लहू
सय्याद असीरों के आगे जब ज़िक्र-ए-बहार आ जाता है
तन्हा है तो इस की फ़िक्र न कर हो राह-ए-तलब में गर्म-ए-सफ़र
'उश्शाक़ का दिल बहलाने को मंज़िल का ग़ुबार आ जाता है
आया जो 'अनादिल पर न तरस बे-जुर्म किया पाबंद-ए-क़फ़स
सय्याद 'अबस अब हमदर्दी क्या जा के वक़ार आ जाता है
उन को हों मुबारक मयख़ाने जो सिर्फ़ हैं मय के दीवाने
मुझ तक तो ख़याल-ए-साक़ी ही मस्ती ब-कनार आ जाता है
ज़ाहिद तू हमारे 'इस्याँ पर यूँ तंज़ न कर मायूस न कर
जब अश्क-ए-नदामत बहते हैं रहमत को भी प्यार आ जाता है
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