क़तरा क़तरा नम मिट्टी में

By ishrat-afreenJanuary 3, 2024
क़तरा क़तरा नम मिट्टी में
बोएँ अपने ग़म मिट्टी में
ये मिट्टी है और तरह की
जमते नहीं क़दम मिट्टी में


ये बच्चे हैं और ही ढब के
खेलते हैं कम-कम मिट्टी में
एक इम्कान और एक अंदेशा
दोनों हैं बाहम मिट्टी में


सच्चल साईं क्या तकते हो
मिल गया इक 'आलम मिट्टी में
शाह भटाई कुछ तो बोलो
कुछ तो हो दम-ख़म मिट्टी में


तुम भी रलते देख रहे हो
बच्चे और परचम मिट्टी में
कैसी अनोखी फ़स्ल उठी है
अपने लहू से नम मिट्टी में


नंगे सूरज से लड़ता है
हरियाली का ग़म मिट्टी में
जब भी कोंपल हाथ हिलाए
देखूँ नया जनम मिट्टी में


सब को इक दिन मिल जाना है
क्या तुम और क्या हम मिट्टी में
22350 viewsghazalHindi