कौन अब जाए नशेमन को सजाने के लिए

By ishrat-jahangirpuriJanuary 3, 2024
कौन अब जाए नशेमन को सजाने के लिए
फिर बहार आई है दीवाना बनाने के लिए
बर्क़ से इतना हमें कहना है ऐ अहल-ए-जहाँ
क्या हमारा ही नशेमन था जलाने के लिए


मैं समझता था कि आहों में असर कुछ भी नहीं
लीजिए आ ही गए ख़ुद वो मनाने के लिए
हम तो समझे थे कि तकमील-ए-मोहब्बत है यही
क्या नवाज़ा था निगाहों से गिराने के लिए


'इश्क़ में दिल पे जो गुज़री है न पूछे वो कोई
रह गया हूँ मैं फ़क़त आँसू बहाने के लिए
आज साक़ी की निगाहें जो उठीं बहर-ए-करम
वो घटा उट्ठी हँसी मेरी उड़ाने के लिए


बा-ख़बर होते न वो राज़-ए-मोहब्बत से कभी
हम को जाना ही न था क़िस्सा सुनाने के लिए
जिस को जीने का हर इक रस्ता बताया था कभी
मुंतख़ब उस ने किया हम को निशाने के लिए


शा'इरी जिन की निगाहों में तरन्नुम है फ़क़त
अब वही आए हैं 'इशरत' को पढ़ाने के लिए
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