कौन इतना कहे क़ातिल से कि 'ईसा हो जा
By mirza-naseer-khalidJanuary 4, 2024
कौन इतना कहे क़ातिल से कि 'ईसा हो जा
हो के मस्लूब तू अफ़्लाक से ऊँचा हो जा
चारागर कोई कहाँ करता है चारासाज़ी
ऐ मिरे ज़ख़्म-ए-जिगर आप ही अच्छा हो जा
आज बे-मेहर ज़माने में बड़ी बात है ये
ग़म के मारों के लिए एक दिलासा हो जा
ज़िंदगी चैन से अपनी जो बसर करनी है
छोड़ दे सब को मिरी जान अकेला हो जा
जितनी भी आग वो बरसाए मगर मैं 'ख़ालिद'
कैसे सुरज से ये कह दूँ कि तू ठंडा हो जा
हो के मस्लूब तू अफ़्लाक से ऊँचा हो जा
चारागर कोई कहाँ करता है चारासाज़ी
ऐ मिरे ज़ख़्म-ए-जिगर आप ही अच्छा हो जा
आज बे-मेहर ज़माने में बड़ी बात है ये
ग़म के मारों के लिए एक दिलासा हो जा
ज़िंदगी चैन से अपनी जो बसर करनी है
छोड़ दे सब को मिरी जान अकेला हो जा
जितनी भी आग वो बरसाए मगर मैं 'ख़ालिद'
कैसे सुरज से ये कह दूँ कि तू ठंडा हो जा
98308 viewsghazal • Hindi