कौनसी शब दिल तुम्हारे वास्ते तड़पा नहीं
By basheer-ahmad-basheerJanuary 2, 2024
कौनसी शब दिल तुम्हारे वास्ते तड़पा नहीं
इस भरी बस्ती में कोई तुम सा बे-परवा नहीं
वाए-क़िस्मत लग गया है जी इक ऐसे शहर में
जिस की गलियों में ब-जुज़ अपने कोई अपना नहीं
ये गली-कूचे हैं जिस कूचे की निस्बत से 'अज़ीज़
इक उसी कूचे की जानिब क्यों क़दम उठता नहीं
कौनसी शाख़-ए-मिज़ा अब के नहीं फूली-फली
अब के दश्त-ए-दिल पे अब्र-ए-ग़म कहाँ बरसा नहीं
चौदहवीं का चाँद शब हम को तो पागल कर गया
देख कर उस को समय याद आए हैं क्या क्या नहीं
मॉन्टगोमेरी की महकती शाम क्या कहना तिरा
तेरे सायों में ग़म-ए-दिल है ग़म-ए-दुनिया नहीं
ता-कनार-ए-चश्म कोई मौज आने दो 'बशीर'
दिल का दरिया देख लेना बे-गुहर दरिया नहीं
इस भरी बस्ती में कोई तुम सा बे-परवा नहीं
वाए-क़िस्मत लग गया है जी इक ऐसे शहर में
जिस की गलियों में ब-जुज़ अपने कोई अपना नहीं
ये गली-कूचे हैं जिस कूचे की निस्बत से 'अज़ीज़
इक उसी कूचे की जानिब क्यों क़दम उठता नहीं
कौनसी शाख़-ए-मिज़ा अब के नहीं फूली-फली
अब के दश्त-ए-दिल पे अब्र-ए-ग़म कहाँ बरसा नहीं
चौदहवीं का चाँद शब हम को तो पागल कर गया
देख कर उस को समय याद आए हैं क्या क्या नहीं
मॉन्टगोमेरी की महकती शाम क्या कहना तिरा
तेरे सायों में ग़म-ए-दिल है ग़म-ए-दुनिया नहीं
ता-कनार-ए-चश्म कोई मौज आने दो 'बशीर'
दिल का दरिया देख लेना बे-गुहर दरिया नहीं
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