ख़ाना-ए-दिल को सजाओगे तो याद आउँगा

By aalam-nizamiJanuary 18, 2024
ख़ाना-ए-दिल को सजाओगे तो याद आउँगा
प्यार की शम' जलाओगे तो याद आऊँगा
भीगे मंज़र में मिरा 'अक्स दिखाई देगा
बारिशों में जो नहाओगे तो याद आऊँगा


होगी महसूस तुम्हें मेरी वफ़ा की ख़ुशबू
तुम कोई ख़ुशबू लगाओगे तो याद आऊँगा
जब भी आएगा तुम्हें सजने सँवरने का ख़याल
पास आईने के जाओगे तो याद आऊँगा


रूठ जाने पे कोई जब न मनाएगा तुम्हें
और तुम सब को मनाओगे तो याद आऊँगा
अपनी तन्हाई को तुम जब भी सुकूत-ए-शब में
मेरी ग़ज़लों को सुनाओगे तो याद आऊँगा


भूलने के लिए मुझ को मिरी यादों के नुक़ूश
सफ़हा-ए-दिल से मिटाओगे तो याद आऊँगा
73676 viewsghazalHindi