खिड़की से झाँकता हुआ चेहरा
By surender-sagarJanuary 5, 2024
खिड़की से झाँकता हुआ चेहरा
आज देखा है चाँद सा चेहरा
तेरे चेहरे में कोई जादू है
जो खिला देता है मिरा चेहरा
सोच कर उन को फेरी थी उँगली
रेत पर उन का बन गया चेहरा
तेरे गालों के एक डिम्पल ने
ख़ूबसूरत बना दिया चेहरा
मेरे ख़्वाबों में रोज़ आता है
चाँद तारों से वो सजा चेहरा
हाल दिल का बयान करता है
दिल का होता है आइना चेहरा
दुख ज़माना के भूल जाता हूँ
देखता जब हूँ आप का चेहरा
कौन सा ग़म सता रहा है तुम्हें
क्यों है इतना बुझा बुझा चेहरा
आज देखा है चाँद सा चेहरा
तेरे चेहरे में कोई जादू है
जो खिला देता है मिरा चेहरा
सोच कर उन को फेरी थी उँगली
रेत पर उन का बन गया चेहरा
तेरे गालों के एक डिम्पल ने
ख़ूबसूरत बना दिया चेहरा
मेरे ख़्वाबों में रोज़ आता है
चाँद तारों से वो सजा चेहरा
हाल दिल का बयान करता है
दिल का होता है आइना चेहरा
दुख ज़माना के भूल जाता हूँ
देखता जब हूँ आप का चेहरा
कौन सा ग़म सता रहा है तुम्हें
क्यों है इतना बुझा बुझा चेहरा
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