ख़ुद से ख़ुद की अन-बन हूँ मैं
By vikas-sahajJanuary 5, 2024
ख़ुद से ख़ुद की अन-बन हूँ मैं
इक सुलझी सी उलझन हूँ मैं
जिस ने देखा नज़रें फेरीं
जाने कितना रौशन हूँ मैं
मुझ को पाना क़िस्मत समझो
इक शबरी का जूठन हूँ मैं
वो पहने या फेंके मुझ को
शहज़ादी का कंगन हूँ मैं
नज़दीकी दुख-दाई होगी
क्रोधित शो का नर्तन हूँ मैं
इक सुलझी सी उलझन हूँ मैं
जिस ने देखा नज़रें फेरीं
जाने कितना रौशन हूँ मैं
मुझ को पाना क़िस्मत समझो
इक शबरी का जूठन हूँ मैं
वो पहने या फेंके मुझ को
शहज़ादी का कंगन हूँ मैं
नज़दीकी दुख-दाई होगी
क्रोधित शो का नर्तन हूँ मैं
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