ख़्वाब हमारा टूट गया है

By qazi-hasan-razaJanuary 4, 2024
ख़्वाब हमारा टूट गया है
रात अँधेरी नींद ख़फ़ा है
दरिया में इक पत्थर फेंका
माज़ी मेरा जाग उठा है


शायद मैं भी ज़हर पियूँगा
हात में इक नीली रेखा है
ख़्वाहिश की तीखी लज़्ज़त ने
शर्म का दामन चाक किया है


फेंक 'रज़ा' ये काली चादर
रात का सीना चाक हुआ है
48536 viewsghazalHindi