ख़्वाब थे आरज़ू थे जाँ थे हम
By surender-sagarJanuary 5, 2024
ख़्वाब थे आरज़ू थे जाँ थे हम
एक दूजे पे मेहरबाँ थे हम
क्यों हटाया गया है धोके से
किस के रस्ते के दरमियाँ थे हम
हर उदासी सुकूँ से ठहरी थी
दर्द और ग़म के मेज़बाँ थे हम
हम ज़रूरत में उस की थे शामिल
उस के दिल में मगर कहाँ थे हम
अब तरसते हैं शे'र के लिए भी
कभी ग़ज़लों का कारवाँ थे हम
एक दूजे पे मेहरबाँ थे हम
क्यों हटाया गया है धोके से
किस के रस्ते के दरमियाँ थे हम
हर उदासी सुकूँ से ठहरी थी
दर्द और ग़म के मेज़बाँ थे हम
हम ज़रूरत में उस की थे शामिल
उस के दिल में मगर कहाँ थे हम
अब तरसते हैं शे'र के लिए भी
कभी ग़ज़लों का कारवाँ थे हम
96967 viewsghazal • Hindi