किस क़दर मंज़िल-ए-आसान में रखा गया हूँ
By shehzad-anjum-burhaniJanuary 5, 2024
किस क़दर मंज़िल-ए-आसान में रखा गया हूँ
फूल असली हूँ मैं गुलदान में रक्खा गया हूँ
दोस्तो अपनी तवज्जोह न हटाना मुझ से
एक उम्मीद हूँ इम्कान में रक्खा गया हूँ
ता न हो मेरी सदा ख़्वाब-गह-ए-शह में मुख़िल
एहतियातन भी मैं ऐवान में रक्खा गया हूँ
वही साहिल की तमन्ना भी रखेगा दिल में
जिस के ईमा पे मैं तूफ़ान में रक्खा गया हूँ
मैं ख़ुदा हूँ न मिरे लफ़्ज़ ख़ुदाई वाले
एक घर है जहाँ जुज़दान में रक्खा गया हूँ
कोई मसरफ़ नहीं रहता है पुरानी शय का
फेंकने के लिए दालान में रक्खा गया हूँ
फूल असली हूँ मैं गुलदान में रक्खा गया हूँ
दोस्तो अपनी तवज्जोह न हटाना मुझ से
एक उम्मीद हूँ इम्कान में रक्खा गया हूँ
ता न हो मेरी सदा ख़्वाब-गह-ए-शह में मुख़िल
एहतियातन भी मैं ऐवान में रक्खा गया हूँ
वही साहिल की तमन्ना भी रखेगा दिल में
जिस के ईमा पे मैं तूफ़ान में रक्खा गया हूँ
मैं ख़ुदा हूँ न मिरे लफ़्ज़ ख़ुदाई वाले
एक घर है जहाँ जुज़दान में रक्खा गया हूँ
कोई मसरफ़ नहीं रहता है पुरानी शय का
फेंकने के लिए दालान में रक्खा गया हूँ
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