कितनी सुख़न की महफ़िलें आबाद कर गया
By wasim-nadirJanuary 5, 2024
कितनी सुख़न की महफ़िलें आबाद कर गया
ख़ामोशियों के हब्स में ख़ुद घुट के मर गया
ऐसा मिला सुकून चुका कर किसी का क़र्ज़
मैला लिबास जैसे बदन से उतर गया
चेहरे बना बना के रखे हैं किताब में
बे-चेहरगी के ख़ौफ़ से मैं कितना डर गया
मुझ को समेटने में लगेगी तमाम 'उम्र
इक शख़्स मेरी ज़ात के अंदर बिखर गया
हम देखते भी किस को तिरी रुख़्सती के बा'द
गर्द-ओ-ग़ुबार राह का आँखों में भर गया
तेरा ख़याल भी किसी सोने से कम नहीं
जितना तपाया हिज्र ने उतना निखर गया
ख़ामोशियों के हब्स में ख़ुद घुट के मर गया
ऐसा मिला सुकून चुका कर किसी का क़र्ज़
मैला लिबास जैसे बदन से उतर गया
चेहरे बना बना के रखे हैं किताब में
बे-चेहरगी के ख़ौफ़ से मैं कितना डर गया
मुझ को समेटने में लगेगी तमाम 'उम्र
इक शख़्स मेरी ज़ात के अंदर बिखर गया
हम देखते भी किस को तिरी रुख़्सती के बा'द
गर्द-ओ-ग़ुबार राह का आँखों में भर गया
तेरा ख़याल भी किसी सोने से कम नहीं
जितना तपाया हिज्र ने उतना निखर गया
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