कोई बैठा रहा शबाब समेत

By ikram-arfiJanuary 3, 2024
कोई बैठा रहा शबाब समेत
और मैं सो गया किताब समेत
ये कहा था तिरा जवाब नहीं
फिर कोई आ गया जवाब समेत


मैं तिरे ख़ाली हाथ के क़ुर्बान
मुझ से मिलना मगर गुलाब समेत
मिलने आया है कोई जान-ए-ग़ज़ल
'मीर' साहिब के इंतिख़ाब समेत


नींद आती है करवटें ले कर
रंज के साथ इज़्तिराब समेत
डूब जाने में कोई हर्ज नहीं
डूबना हो अगर शराब समेत


18134 viewsghazalHindi