कोई नक़्क़ाद आस-पास नहीं
By hasrat-khan-khatakJanuary 3, 2024
कोई नक़्क़ाद आस-पास नहीं
शे'र है शे'र में क़यास नहीं
हक़-ओ-बातिल बताना लाज़िम था
मसअला कर्बला का प्यास नहीं
रंग फ़ितरत का जितना 'उर्यां है
उस क़दर कोई बे-लिबास नहीं
'इश्क़ है बे-जुनूँ तो 'इश्क़ नहीं
ख़ाक जज़्बा है जिस में आस नहीं
बंदगान-ए-ख़ुदा से ना-वाक़िफ़
कोई भी हो ख़ुदा-शनास नहीं
ऐसी सुर्ख़ी क़ुबूल सब्ज़े की
जिस में कोयल कोई उदास नहीं
इक ज़माना है ‘ख़ान-हसरत-ख़ान’
ख़ुद ज़माना ज़माँ-शनास नहीं
शे'र है शे'र में क़यास नहीं
हक़-ओ-बातिल बताना लाज़िम था
मसअला कर्बला का प्यास नहीं
रंग फ़ितरत का जितना 'उर्यां है
उस क़दर कोई बे-लिबास नहीं
'इश्क़ है बे-जुनूँ तो 'इश्क़ नहीं
ख़ाक जज़्बा है जिस में आस नहीं
बंदगान-ए-ख़ुदा से ना-वाक़िफ़
कोई भी हो ख़ुदा-शनास नहीं
ऐसी सुर्ख़ी क़ुबूल सब्ज़े की
जिस में कोयल कोई उदास नहीं
इक ज़माना है ‘ख़ान-हसरत-ख़ान’
ख़ुद ज़माना ज़माँ-शनास नहीं
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