कुछ न कुछ आया तो होगा उस के जी में
By yashvardhan-mishraJanuary 5, 2024
कुछ न कुछ आया तो होगा उस के जी में
फिर छुपाया होगा मुझ को डायरी में
बाम पर मैं बैठ कर ये सोचता हूँ
शब नहाई होगी उस की रौशनी में
बात सारी चाँद से करता हूँ उस की
होश रहता ही नहीं बादा-कशी में
मुझ को अब तन्हाई खलती जा रही है
हो रहा है ये तिरी मौजूदगी में
हो गया पागल तिरी ख़ातिर वो लड़का
कुछ कमी रक्खी नहीं दीवानगी में
फिर छुपाया होगा मुझ को डायरी में
बाम पर मैं बैठ कर ये सोचता हूँ
शब नहाई होगी उस की रौशनी में
बात सारी चाँद से करता हूँ उस की
होश रहता ही नहीं बादा-कशी में
मुझ को अब तन्हाई खलती जा रही है
हो रहा है ये तिरी मौजूदगी में
हो गया पागल तिरी ख़ातिर वो लड़का
कुछ कमी रक्खी नहीं दीवानगी में
61485 viewsghazal • Hindi