क्या कम है ये भी वा'दा-ए-फ़र्दा किया तो है

By bazm-ansariJanuary 2, 2024
क्या कम है ये भी वा'दा-ए-फ़र्दा किया तो है
आए न आए उस ने मिरा दिल रखा तो है
दिल ख़ून हो गया है मगर राएगाँ नहीं
रौशन मिरे लहू से चराग़-ए-वफ़ा तो है


बे-नाख़ुदा भी पार उतरती हैं कश्तियाँ
वो जिन का नाख़ुदा नहीं उन का ख़ुदा तो है
वो उस का मुस्कुरा के मिरा हाल पूछना
इक हादिसा सही सर-ए-राहे हुआ तो है


ऐ रहरवान-ए-राह-ए-मोहब्बत चले चलो
मंज़िल का क्या मिले न मिले रास्ता तो है
हालात साज़गार नहीं हैं तो क्या हुआ
तूफ़ान ना-गुज़ीर सही हौसला तो है


हर दौर से है 'बज़्म' 'इबारत मिरी ग़ज़ल
देखा नहीं जो दौर वो आख़िर पढ़ा तो है
59054 viewsghazalHindi