क्या क्या तिरे फ़िराक़ में यूँ कर नहीं गया

By shahbaz-choudharyJanuary 5, 2024
क्या क्या तिरे फ़िराक़ में यूँ कर नहीं गया
लेकिन हुदूद-ए-ज़ात के बाहर नहीं गया
राह-ए-वफ़ा में तेरी तसल्ली के बावजूद
तन्हा कटेगी 'उम्र यही डर नहीं गया


कहता था मुझ से जो कि सितारों से माँग भर
फिरता यहीं वहीं है फ़लक पर नहीं गया
मुझ से बिछड़ के तेरी भी शह-रग नहीं कटी
तुझ से बिछड़ के मैं भी कोई मर नहीं गया


ज़िद थी कि तुझ सा ढूँड के लौटूँगा गाँव को
इस जुस्तुजू में आज भी मैं घर नहीं गया
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