क्या पता था एक दिन हम बे-हुनर हो जाएँगे
By ahmed-arsalanJanuary 1, 2024
क्या पता था एक दिन हम बे-हुनर हो जाएँगे
ग़म के तूफ़ाँ हम पे हावी इस क़दर हो जाएँगे
जो तसव्वुर में मिरे दिन-रात करते हैं तवाफ़
रब ने चाहा तो वो मेरे हम-सफ़र हो जाएँगे
मुश्किलों का आफ़तों का डर नहीं कोई मुझे
मरहले माँ की दु'आओं से तो सर हो जाएँगे
आज ग़म है कल ख़ुशी के दिन भी आएँगे ज़रूर
मुश्किलों के लम्हे यूँ तो मुख़्तसर हो जाएँगे
कारवाई जब करोगे नेक लोगों के ख़िलाफ़
देख लेना सारे हरबे बे-असर हो जाएँगे
वो बहुत ही ख़ुश हुए थे छोड़ कर तन्हा हमें
ये गुमाँ था उन को अब हम दर-ब-दर हो जाएँगे
आप कहते हो सिखाएँ शे'र के उन को रुमूज़
वो अगर छा जाएँगे हम बे-असर हो जाएँगे
शुक्र-ए-रब करता रहेगा लम्हा-लम्हा 'अर्सलान'
आप क़िस्मत से कभी मेरे अगर हो जाएँगे
ग़म के तूफ़ाँ हम पे हावी इस क़दर हो जाएँगे
जो तसव्वुर में मिरे दिन-रात करते हैं तवाफ़
रब ने चाहा तो वो मेरे हम-सफ़र हो जाएँगे
मुश्किलों का आफ़तों का डर नहीं कोई मुझे
मरहले माँ की दु'आओं से तो सर हो जाएँगे
आज ग़म है कल ख़ुशी के दिन भी आएँगे ज़रूर
मुश्किलों के लम्हे यूँ तो मुख़्तसर हो जाएँगे
कारवाई जब करोगे नेक लोगों के ख़िलाफ़
देख लेना सारे हरबे बे-असर हो जाएँगे
वो बहुत ही ख़ुश हुए थे छोड़ कर तन्हा हमें
ये गुमाँ था उन को अब हम दर-ब-दर हो जाएँगे
आप कहते हो सिखाएँ शे'र के उन को रुमूज़
वो अगर छा जाएँगे हम बे-असर हो जाएँगे
शुक्र-ए-रब करता रहेगा लम्हा-लम्हा 'अर्सलान'
आप क़िस्मत से कभी मेरे अगर हो जाएँगे
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