क्या सितम है कि मदद-गार समझ लेते हैं
By wasim-nadirJanuary 5, 2024
क्या सितम है कि मदद-गार समझ लेते हैं
सब तुम्हें मेरा तरफ़-दार समझ लेते हैं
हम ने पाज़ेब में लिपटी हुई आहें भी सुनी
आप झंकार को झंकार समझ लेते हैं
बात अगर डूब के मरने की ही ठहरी तो हम
एक आँसू को भी मझधार समझ लेते हैं
मुझ को आती है हँसी सर से बंधे कपड़ों को
लोग किस शौक़ से दस्तार समझ लेते हैं
क्या हिमाक़त है कि हम सादा तबी'अत वाले
ख़ामुशी को तिरी इंकार समझ लेते हैं
सब तुम्हें मेरा तरफ़-दार समझ लेते हैं
हम ने पाज़ेब में लिपटी हुई आहें भी सुनी
आप झंकार को झंकार समझ लेते हैं
बात अगर डूब के मरने की ही ठहरी तो हम
एक आँसू को भी मझधार समझ लेते हैं
मुझ को आती है हँसी सर से बंधे कपड़ों को
लोग किस शौक़ से दस्तार समझ लेते हैं
क्या हिमाक़त है कि हम सादा तबी'अत वाले
ख़ामुशी को तिरी इंकार समझ लेते हैं
52064 viewsghazal • Hindi