लगा है रोग कोई तो जड़ों में

By chand-kakralviJanuary 19, 2024
लगा है रोग कोई तो जड़ों में
उदासी क्यों है वर्ना टहनियों में
भले ही बर्फ़ की चादर उढ़ा दो
जलन फिर भी रहेगी आबलों में


हवस की उँगलियों पर आ गए हैं
थे जितने रंग तितली के परों में
बहुत नुक़्सान कर देता है पानी
ठहर जाए अगर कच्चे घरों में


तसल्ली मिल गई प्यासी ज़मीं को
हुआ टकराव जब भी बादलों में
तिरे नक़्श-ए-क़दम को छोड़ कर हम
उलझ कर रह गए हैं रास्तों में


46577 viewsghazalHindi