लगा के आई थी सौतन ख़िज़ाब 'ईद के दिन

By sajid-sajni-lakhnawiJanuary 4, 2024
लगा के आई थी सौतन ख़िज़ाब 'ईद के दिन
मुई पे टूट पड़ा था शबाब 'ईद के दिन
उधर वो हुस्न में था इंतिख़ाब 'ईद के दिन
इधर न था कोई मेरा जवाब 'ईद के दिन


वो चाँद रात को मुझ से बिगड़ के चलते बने
बिखर के रह गए रंगीन ख़्वाब 'ईद के दिन
मैं क्या बताऊँ कि क्या हश्र कर रहा था बपा
निगोड़ी सौत का उठता शबाब 'ईद के दिन


वो अब भी मेरे दुपट्टे की तह में रक्खा है
जो उस ने पेश किया था गुलाब 'ईद के दिन
82214 viewsghazalHindi