लहू लहू मिरे किरदार के सलीक़े हैं

By safdar-imaam-quadriJanuary 4, 2024
लहू लहू मिरे किरदार के सलीक़े हैं
वरक़ वरक़ इसी बन-बास के हवाले हैं
रिवायतों की नए मरहलों की बात नहीं
हमें तो देखना है किस में कितने हीरे हैं


रईस-ए-शहर की आँखों में ये उदासी क्यों
अभी तो जिस्म के सारे निशान नीले हैं
हमारी बाँझ कहानी का वक़्त ख़त्म हुआ
ज़मीं की कोख में एहसास के जज़ीरे हैं


उदास उदास फ़साना सही मगर सोचो
नई हयात की ख़ातिर बहुत से हीले हैं
79140 viewsghazalHindi