लीजिए हम बादशाहों से भी ऊपर हो गए

By wasim-nadirJanuary 5, 2024
लीजिए हम बादशाहों से भी ऊपर हो गए
रख-रखाव दूर फेंका और क़लंदर हो गए
दासियां और कैसे रक्खें देवताओं का ख़याल
हाथ जोड़े सर झुकाए जिस्म पत्थर हो गए


चाँद को पाने की ख़्वाहिश हो गई पूरी मगर
नन्हे-मुन्ने सारे जुगनू घर से बाहर हो गए
सोचना ये है तरसते थे जो इक इक बूँद को
एक ही बरसात में कैसे समंदर हो गए


घर के बटवारे को ले कर भाई सब उलझे रहे
और इस मुद्दत में सारे खेत बंजर हो गए
51782 viewsghazalHindi